अभावग्रस्त बच्चों के जीवन में इल्म की शमां रोशन कर रही .....वीना

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Published: 31 January 2017
100 times Last modified on Saturday, 11 February 2017 10:58
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देेहरादून स्थित पाॅश कालोनी इंद्रा नगर का एक घर। यह एक घर कम और खुशियों का जहान अधिक है। इस छोटे से घर में मासूम और असहाय बच्चों का भविष्य संवारा जाता है। स्ल एरिया के 35 बच्चे यहां रोजाना शिक्षा हासिल करने के लिए आते हैं। उनका स्किल डेवलमेंट किया जाता है और सबसे अहम बात कि शिक्षा के साथ ही पौष्टिक अल्पाहार भी दिया जाता है और वह भी निशुल्क।
जीवन की सांध्यवेला में जब व्यक्ति सकून तलाशता है। अपना सुख उसे दूसरों की तुलना में अधिक दिखायी देता है। शारीरिक व्याधियां सताने लगती हैं, उम्र के इस पड़ाव में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं निश्वार्थ अपना जीवन दूसरों के लिए जीते हैं। ऐसी ही हैं वीना जोशी। 
सिर पर सफेद बाल, आंखों पर चश्मा और माथे पर लाल बिंदी लगाए वीना जोशी अपने से कहीं युवा और सक्षम लोगों के लिए प्ररेणा की स्रोत बनी हैं। वह आओ पढ़ें के माध्यम से अपने घर में ही स्लम बस्तियों के बच्चों को विगत 14 साल से पढ़ा रही हैं। इनमें घरों में काम करने वाली महिलाओं के बच्चे, दिहाड़ी मजदूरों, धोबी और मालियों के बच्चे हैं। इस स्कूल में हर रोज दो घंटे शाम को बच्चों को शिक्षा दी जाती है। वीना बताती हैं कि बच्चों को इंग्लिश, गणित, कंप्यूटर और सामान्य ज्ञान की शिक्षा दी जाती है। उनके अनुसार बच्चों को शिक्षा देने के लिए तीन शिक्षिकाएं भी हैं जिनको मानदेय भी दिया जाता है।

स्लम के बच्चों को शिक्षा
वीना जोशी के पति डा. बीकेे जोशी कुमाउं विश्वद्यिालय के कुलपति रहे हैं। वीना जोशी स्वयं 35 साल तक विभिन्न स्कूलांे में अध्यापिका रहीं। उनके अनुसार वर्ष 2002 में जब उनके पति रिटायर हो गये, तो उन्होंने देहरादून में बसने का फैसला किया। डा. जोशी को दून लाइब्रेरी में निदेशक बना दिया गया। ऐसे में मैं अकेली रह गयी थी। डा. जोशी ने ही सुझाव दिया कि स्लम के बच्चों को पढ़ाने का काम करो। मैं आसपास के स्लम एरिया में गई और बच्चों के अभिभावकांे को समझाया कि वह अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजें। वह हसते हुए कहती हैं कि पहले तो अभिभावक डरे कि कहीं फीस न मांग ले, लेकिन जब मैंने कहा कि मुुफ्त शिक्षा मिलेगी, तो कुछ तैयार हो गये। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ी और अब 35 बच्चे हो गये हैं। 

बच्चों को शिक्षा के साथ पौष्टिक आल्पाहार भी

वीना के मुताबिक यहां पढ़ने के लिए आने वाले बच्चों को रोजाना दूध -फल और पौष्टिक अल्पाहार दिया जाता है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए अल्पाहार देते हैं। इसके अलावा बच्चों को यूनिफार्म भी मुफ्त दी जाती है। वह बताती हैं कि लोग मुझसे इन बच्चों को पढ़ाने की बात करते हैं, रोजाना ही फोन आते हैं, लेकिन मैं उनसे कहती हूं कि आपको शिक्षिका नहीं बना सकती। समाज सेवा एक बड़ी तपस्या होती है। यही कारण है कि मैं अपने यहां की शिक्षिकाओं को मानदेय देती हूं। उनके अनुसार समाज में कुछ अच्छे लोग भी होते हैं, उनके डोनेशन से स्कूल चल रहा है। इनमें से एक थे न्यू जर्सी में रहने वाले जीतू भाई। वह एक निश्चित रकम भेज देते थे, लेकिन गत वर्ष उनका निधन हो गया। और अब संस्था चलाने में आर्थिक कठिनाइयां आ रही हैं।

मसाले बेच कर चला रही स्कूल 
स्कूल चलाने के लिए आर्थिक समस्या न गहरा जाए, इसके लिए वीना जोशी ने एक अनूठी पहल की। उन्होंने उत्तरा और दिवा नाम से मसालों की शुरुआत की। वह अल्मोड़ा और उत्तराखंड के अन्य जिलों से हल्दी और अन्य मसाले एकत्रित करती हैं। इन मसालों को गुणवत्ता को विशेष महत्व दिया जाता है। वह बताती हैं कि उनके पास 52 किस्म के मसाले उपलब्ध हैं। इनकी पैकिंग छोटे-छोटे पैकट्स में की गई है ताकि कोई भी इन्हें खरीद सके। ये मसाले बाजार भाव से महज एक-दो रुपये महंगे होते हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण होते हैं। उनके अनुसार वेल्हम गल्र्स व ब्वाइज स्कूल समेत नामी स्कूलों में उनके मसालों की प्रदर्शनी लगती है तो उन्हें जरूर बुलाया जाता है। यहां स्टाल पर उनके मसाले बेचे जाते हैं। वह बताती हैं कि मसाले बेचने के बाद जो भी आय होती है वह स्लम के बच्चों पर खर्च की जाती है। उन्होंने घर के एक कोने में मसालों की एक दुकान भी खोल दी है ताकि लोगों को मसाले लेने में दिक्कत न हो। अल्मोड़ा की हल्दी बड़िया, मुगोठिया और आलू के पापड़ उनके सर्वाधिक लोकप्रिय उत्पाद हैं। 15 किस्म के गरम मसाले उपलब्ध हैं। वह कहती हैं कि इससे पांच महिलाओं को नियमित रोजगार भी मिल रहा है। 

शिक्षा की गुणवत्ता की पक्षधर
वीना जोशी अपने स्कूल में क्वाॅलिटी एजुकेशन को और अधिक सुधार करना चाहती है। उनके अनुसार उनके पास जगह नहीं है कि स्कूल का विस्तार हो। उनके अनुसार यह कार्य कठिन है। वह चाहती हैं कि स्कूल निर्बाध रूप से चलता रहे। उन्हें बताया गया है कि उनका स्कूल सर्व शिक्षा के प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया है। लेकिन अब तक कोई विधिवत सूचना नहीं है।

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